चित्रकूट धाम में पूज्य मोरारी बापू जी की पावन उपस्थिति!
चित्रकूट धाम, घाटकोपर पूर्व में परम पूज्य श्री मोरारी बापू जी की पावन उपस्थिति में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का अलौकिक समापन हुआ।बापूजी की पवित्र वाणी से रामकथा का अमृत पान करना मेरे लिए अद्भुत दिव्य अनुभव रहा।आज बापूजी ने वाणी को मां का स्वरूप बताया,क्योंकि वाणी ही रिश्ते जोड़ती है, और वाणी ही उन्हें तोड़ भी सकती है।विभिन्न परंपराओं जैसे ॐ, जैन, वैष्णव, बौद्ध आदि का महिमा का वर्णन कर, जीव–दया और संवेदना से युक्त वेदों को “मां” की उपाधि प्रदान करते हुए बापूजी ने सुंदर संदेश दिया।जगद्गुरु शंकराचार्य श्री कांची कामकोटि पीठम जी की दिव्य उपस्थिति ने कार्यक्रम को और पावन बनाया।रामेश्वर स्थापना से लेकर सीता–राम मिलन, रावण वध, अयोध्या महोत्सव, तथा श्रीराम तिलक समारोहहर प्रयोग हृदय में भक्ति का दीप प्रज्वलित कर गया।अंत में बापूजी ने कहाँ “हनुमानजी अमर हैं, समय मिले तो रामनाम जपते रहें”बापूजी की यह आज्ञा हृदय में सदैव अंकित रहेगी।इस शुभ अवसर पर मुझे “श्री सम्पन्न साधु” की उपाधि प्राप्त हुई, जिससे समाजसेवा का संकल्प और मजबूत हुआ।मेरे पोते के हाथों से निष्ठावान कर्मचारी को फ्लैट की चाबी सौंपते हुए मुझे बेहद ख़ुशी महसूस हुई।इन नौ दिवसीय पवित्र क्षणों ने मन और आत्मा में असीम सकारात्मक ऊर्जा भरी है।प्रभु श्रीराम की कृपा यूँ ही सब पर बनी रहे यही प्रभु श्री राम जी के चरणों में प्रार्थना की ।जय श्रीराम।






